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नंगे पैर चलने से बहुत सारे बीमारियों से छुटकारा मिलता है। वीडियो क्लिप संलग्न है।

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Vivek

*_अब हार्ट अटैक की चिंता छोड़िये_*
देखिये नई तकनीक:

इस प्रकार की एंजियोग्राफी जिसके द्वारा *हार्ट ब्लॉक्स* डायरेक्ट निकाल दिया जाता है, *जे जे हॉस्पिटल मुम्बई* में उपलब्ध है. *खर्च मात्र ₹5000/-.*

वीडियो अवश्य देखें और कृपया जरूरतमंदों तक पहुँचाने का कष्ट करें. आपके पास जितने कॉन्टेक्ट नम्बर हैं उन्हें व समस्त ग्रुप्स को यह शुभ समाचार व वीडियो तुरन्त प्रेषित करें. *महत्वपूर्ण जानकारी शेयर करने का आनन्द ही अलग होता है.*

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Solution to heal back pain

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👆आपने व्यायाम किया या नहीं किया तो आपके 10 साल कैसे होंगे........ इसे बताने के लिए कनाडा सरकार द्वारा जारी किया गया सुंदर वीडियो

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Suryakant Nagar

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Dr. Nirmal Mehta

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*50 पार.... अब आपका तन,आपके मन का आज्ञाकारी नही रह पाता*...!! 

 From the wall of Dr.Ramesh chndra  Parashar.

मैंने  अपने चिकित्सकीय अनुभव मे जाना कि मन चाहे कितना ही जोशीला हो, साठापाठा होते ही, तन उतना फ़ुर्तीला नहीं रह जाता ? शरीर ढलान पर होता है और ‘रिफ्लेक्सेज़’ कमज़ोर ! कभी कभी मन भ्रम बनाए रखता है कि ‘ये काम तो चुटकी मे कर लूँगा’ पर बहुत जल्दी सच्चाई सामने होती है, मगर एक नुक़सान के साथ ? 

सीनियर सिटिज़न होने पर जिन बातों का ख़याल रखा जाना चाहिये , ऐसी कुछ टिप्स देना चाहूँगा ? धोखा तभी होता है जब मन सोचता है ‘कर लूंगा’ और शरीर करने से ‘चूक’ जाय ? परिणाम एक एक्सीडेंट और शारीरिक क्षति ? ये क्षति, हड्डी के फ़्रैक्चर से लेकर ‘हेड इंज्यूरी’ तक हो सकती है ? याने जान लेवा भी , कभी कभी ? 

इसलिये जिन्हें भी आदत हो हमेशा हड़बड़ी मे रहने और काम करने की , बेहतर होगा कि वे अपनी आदतें बदल डालें ? भरम न पालें , सावधानी बरतें क्योंकि आप अब पहले की तरह फ़ुर्तीले नहीं रह गये ? छोटी चूक कभी बड़े नुक़सान का सबब बन जाती है ?

सुबह नींद खुलते ही तुरंत बिस्तर छोड़ खड़े न हों ! पहले बिस्तर पर कुछ मिनट बैठे रहें और पूरी तरह चैतन्य हो लें ? कोशिश करें कि बैठे बैठे ही स्लीपर / चप्पलें पैर मे डाल लें या खड़े होने पर मेज़ या किसी सहारे को पकड़ कर ही चप्पलें पहने ! अकसर यही समय होता है डगमगा कर गिर जाने का ? 

सबसे ज़्यादा घटनाएँ गिरने की बॉथरूम/वॉशरूम या टॉयलेट मे ही होतीं हैं ? आप चाहे नितांत अकेले , पति पत्नी साथ या संयुक्त परिवार मे रहते हों, बॉथरूम मे अकेले ही होते हैं ? 

घर मे अकेले रहते हों तो अतिरिक्त सावधानी बरतें क्योंकि गिरने पर यदि उठ न सके तो दरवाज़ा तोड़कर ही आप तक सहायता पहुँच सकेगी ? वह भी तब, जब आप पड़ोसी तक सूचना पहुँचाने मे समय से कामयाब हो सके ? याद रखें बाथरूम मे भी मोबाइल साथ हो ताकि वक़्त ज़रूरत काम आ सके ? बाकी भूल चूक लेनी देनी नही, देनी ही देनी होती है ?

हमेशा कमोड का ही इस्तेमाल करें ! यदि न हो, तो समय रहते बदलवा लें, ज़रूरत पड़नी ही है, चाहे कुछ समय बाद ? कमोड के पास संभव हो तो एक हैंडिल लगवा लें ! कमज़ोरी की स्थिति मे ये ज़रूरी हो जाता है ? ( प्लास्टिक के वेक्यूम हैंडिल भी मिलते हैं, जो टॉइल्स जैसी चिकनी सतह पर चिपक जाते हैं, पर इन्हें हर बार इस्तेमाल से पहले खींचकर ज़रूर परख लें )

हमेशा आवश्यक ऊँचे स्टूल पर बैठकर ही नहॉंएं ! बॉथरूम के फ़र्श पर रबर की मैट ज़रूर बिछा रखें आवश्यकतानुसार फिसलन से बचने ? गीले हाथों से टाइल्स  लगी दीवार का सहारा कभी न लें, हाथ फिसलते ही आप ‘डिसबैलेंस’ होकर गिर सकते हैं ? 

बॉथरूम के ठीक बाहर सूती मैट भी रखें जो गीले तलवों से पानी सोख ले ! कुछ सेकेण्ड उस पर खड़े होकर फिर फ़र्श पर पैर रखें वो भी सावधानी से !

अंडरगारमेंट हों या कपड़े, अपने चेंजरूम या बेडरूम मे ही पहने ! अंडरवियर,पजामा या पैंट खडे़ खडे़ कभी नही पहने ! हमेशा बैठ कर ही उनके पायचों मे पैर डालें, फिर खड़े होकर पहिने वर्ना दुर्घटना घट सकती है ? कभी स्मार्टनेस की बड़ी क़ीमत चुकानी पड़ जाती है ?

अपनी दैनिक ज़रूरत की चीज़ों को नियत जगह पर ही रखने की आदत डाल लें , जिससे उन्हें आसानी से उठाया या तलाशा जा सके ? भूलने की ज़्यादा आदत हो आवश्यक चीज़ों की लिस्ट मेज़ पर या दीवार पर लगा लें , घर से निकलते समय एक निगाह उस पर डाल लें, आसानी रहेगी !   

जो दवाएँ रोज़ाना लेनी हों तो प्लास्टिक के प्लॉनर मे रखें जिसमें जुड़ी हुई डिब्बियों मे हफ़्ते भर की दवाएँ दिनवार रखी जाती है ! अकसर भ्रम हो जाता है कि दवाएँ ले ली हैं या भूल गये ?  प्लॉनर मे से दवा खाने मे चूक नही होगी ? 

सीढ़ियों से चढ़ते उतरते समय, सक्षम होने पर भी, हमेशा रेलिंग का सहारा लें ? ख़ासकर मॉल्स के एक्सलेटर पर ? *ध्यान रहे आपका शरीर आपके मन का अब पहले जैसा ‘ओबीडियेंट सर्वेंट’ नही रहा*...

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*खुशवंत सिंह* के लिखे ज़िंदगी के दस सूत्र ।

इन दसों सूत्रों को पढ़ने के बाद पता चला कि सचमुच खुशहाल ज़िंदगी और शानदार मौत के लिए ये सूत्र बहुत ज़रूरी हैं।

1. *अच्छा स्वास्थ्य* - अगर आप पूरी तरह स्वस्थ नहीं हैं, तो आप कभी खुश नहीं रह सकते। बीमारी छोटी हो या बड़ी, ये आपकी खुशियां छीन लेती हैं।

2. *ठीक ठाक बैंक बैलेंस* - अच्छी ज़िंदगी जीने के लिए बहुत अमीर होना ज़रूरी नहीं। पर इतना पैसा बैंक में हो कि आप आप जब चाहे बाहर खाना खा पाएं, सिनेमा देख पाएं, समंदर और पहाड़ घूमने जा पाएं, तो आप खुश रह सकते हैं। उधारी में जीना आदमी को खुद की निगाहों में गिरा देता है।

3. *अपना मकान* - मकान चाहे छोटा हो या बड़ा, वो आपका अपना होना चाहिए। अगर उसमें छोटा सा बगीचा हो तो आपकी ज़िंदगी बेहद खुशहाल हो सकती है।

4. *समझदार जीवन साथी* - जिनकी ज़िंदगी में समझदार जीवन साथी होते हैं, जो एक-दूसरे को ठीक से समझते हैं, उनकी ज़िंदगी बेहद खुशहाल होती है, वर्ना ज़िंदगी में सबकुछ धरा का धरा रह जाता है, सारी खुशियां काफूर हो जाती हैं। हर वक्त कुढ़ते रहने से बेहतर है अपना अलग रास्ता चुन लेना।

5. *दूसरों की उपलब्धियों से न जलना* - कोई आपसे आगे निकल जाए, किसी के पास आपसे ज़्यादा पैसा हो जाए, तो उससे जले नहीं। दूसरों से खुद की तुलना करने से आपकी खुशियां खत्म होने लगती हैं।

6. *गप से बचना* - लोगों को गपशप के ज़रिए अपने पर हावी मत होने दीजिए। जब तक आप उनसे छुटकारा पाएंगे, आप बहुत थक चुके होंगे और दूसरों की चुगली-निंदा से आपके दिमाग में कहीं न कहीं ज़हर भर चुका होगा।

7. *अच्छी आदत* - कोई न कोई ऐसी हॉबी विकसित करें, जिसे करने में आपको मज़ा आता हो, मसलन गार्डेनिंग, पढ़ना, लिखना। फालतू बातों में समय बर्बाद करना ज़िंदगी के साथ किया जाने वाला सबसे बड़ा अपराध है। कुछ न कुछ ऐसा करना चाहिए, जिससे आपको खुशी मिले और उसे आप अपनी आदत में शुमार करके नियमित रूप से करें।

8. *ध्यान* - रोज सुबह कम से कम दस मिनट ध्यान करना चाहिए। ये दस मिनट आपको अपने ऊपर खर्च करने चाहिए। इसी तरह शाम को भी कुछ वक्त अपने साथ गुजारें। इस तरह आप खुद को जान पाएंगे।

9. *क्रोध से बचना* - कभी अपना गुस्सा ज़ाहिर न करें। जब कभी आपको लगे कि आपका दोस्त आपके साथ तल्ख हो रहा है, तो आप उस वक्त उससे दूर हो जाएं, बजाय इसके कि वहीं उसका हिसाब-किताब करने पर आमदा हो जाएं।

10. *अंतिम समय* - जब यमराज दस्तक दें, तो बिना किसी दुख, शोक या अफसोस के साथ उनके साथ निकल पड़ना चाहिए अंतिम यात्रा पर, खुशी-खुशी। शोक, मोह के बंधन से मुक्त हो कर जो यहां से निकलता है, उसी का जीवन सफल होता है।

*मुझे नहीं पता कि खुशवंत सिंह ने पीएचडी की थी या नहीं। पर इन्हें पढ़ने के बाद मुझे लगने लगा है कि ज़िंदगी के डॉक्टर भी होते हैं। ऐसे डॉक्टर ज़िंदगी बेहतर बनाने का फॉर्मूला देते हैं । ये ज़िंदगी के डॉक्टर की ओर से ज़िंदगी जीने के लिए दिए गए नुस्खे है।*🌹😀👏👍🙏

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